जितनी जिसकी संख्या भारी, उतनी उसकी भागीदारी”महाराष्ट्र प्रतिनिधी संजीव भांबोरे की और सेगोंदिया -गोंदिया जिला शासकीय विश्रामगृह में अखिल भारतीय ओबीसी बहुजन महासंघ की भव्य बैठक बड़े उत्साह और जोश के साथ सम्पन्न हुई। इस ऐतिहासिक बैठक में राष्ट्रीय, प्रादेशिक और जिला स्तर के पदाधिकारियों के साथ-साथ कार्यकर्ता तथा नागरिकों ने बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई।और बडे उत्साह से आरक्षण विस्तार अभियान कि संघटनात्मक बैठक सम्पन्न हुयी l….. बैठक की शुरुआत “जय संविधान, जय ओबीसी,जय बहुजन, जय सेवा” जैसे गगनभेदी नारों से हुई। इन नारों ने वातावरण को ओबीसी बहुजन एकता की भावना से गुंजायमान कर दिया। महासंघ के संस्थापक अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. खुशाल बोपचे ने अपने मार्गदर्शन में कहा कि -“देश को स्वतंत्र हुए 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन आज भी ओबीसी और बहुजन समाज को अपने घटनात्मक अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। यही दुखद वास्तविकता बदलने के लिए महासंघ की स्थापना की गई है।”उन्होंने 1902 में शाहू महाराज द्वारा कोल्हापुर संस्थान में ओबीसी समाज को 50 प्रतिशत आरक्षण देने की ऐतिहासिक घटना को याद किया। स्वतंत्रता के बाद भी ओबीसी को उनकी जनसंख्या केअनुपात में न्याय नहीं मिला, यह सवाल उन्होंने तीखे शब्दों में रखा।डॉ. बोपचे ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 340 में स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद आज भी “क्रीमीलेयर” जैसी घटनाबाह्य शर्तों के कारण लाखों विद्यार्थी और युवा आरक्षण से वंचित हो रहे हैं। इसे हटाकर ही “जितनी संख्या भारी, उतनी भागीदारी” का लक्ष्य पूरा किया जा सकता है।महासंघ की प्रमुख माँगेंबैठक में सर्वसम्मति से ओबीसी समाज के हक में कई ठोस माँगें रखी गईं, जिनमें प्रमुख हैं -ओबीसी की जातिवार जनगणना तुरंत की जाए।, केंद्र में स्वतंत्र ओबीसी मंत्रालय की स्थापना हो।, क्रीमीलेयर की शर्त समाप्त की जाए, न्यायपालिका के सभी स्तरों पर आरक्षण लागू हो।, जिला व तहसील स्तर पर विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की व्यवस्था हो।, पदोन्नति में आरक्षण लागू कर रोकी गई न्याय प्रक्रिया बहाल की जाए।, बैकलॉग भर्ती के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।, किसानों को 100 प्रतिशत अनुदान पर कृषि संसाधन उपलब्ध हों।, आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा समाप्त की जाए।, मंडल आयोग, नचिप्पन समिति और स्वामिनाथन आयोग की सिफारिशें तुरंत लागू हों।, किसानों व खेत मजदूरों को 55 वर्ष की आयु के बाद पेंशन योजना दी जाए।, सरकारी व सार्वजनिक उद्योगों के निजीकरण पर रोक लगे।, महात्मा फुले और क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले को मरणोपरांत भारत रत्न सम्मान दिया जाए
अखिल भारतीय ओबीसी बहुजन महासंघ की गोंदिया मे बैठक संपन्न “
जितनी जिसकी संख्या भारी, उतनी उसकी भागीदारी”महाराष्ट्र प्रतिनिधी संजीव भांबोरे की और सेगोंदिया -गोंदिया जिला शासकीय विश्रामगृह में अखिल भारतीय ओबीसी बहुजन महासंघ की भव्य बैठक बड़े उत्साह और जोश के साथ सम्पन्न हुई। इस ऐतिहासिक बैठक में राष्ट्रीय, प्रादेशिक और जिला स्तर के पदाधिकारियों के साथ-साथ कार्यकर्ता तथा नागरिकों ने बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई।और बडे उत्साह से आरक्षण विस्तार अभियान कि संघटनात्मक बैठक सम्पन्न हुयी l….. बैठक की शुरुआत “जय संविधान, जय ओबीसी,जय बहुजन, जय सेवा” जैसे गगनभेदी नारों से हुई। इन नारों ने वातावरण को ओबीसी बहुजन एकता की भावना से गुंजायमान कर दिया। महासंघ के संस्थापक अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. खुशाल बोपचे ने अपने मार्गदर्शन में कहा कि -“देश को स्वतंत्र हुए 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन आज भी ओबीसी और बहुजन समाज को अपने घटनात्मक अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। यही दुखद वास्तविकता बदलने के लिए महासंघ की स्थापना की गई है।”उन्होंने 1902 में शाहू महाराज द्वारा कोल्हापुर संस्थान में ओबीसी समाज को 50 प्रतिशत आरक्षण देने की ऐतिहासिक घटना को याद किया। स्वतंत्रता के बाद भी ओबीसी को उनकी जनसंख्या केअनुपात में न्याय नहीं मिला, यह सवाल उन्होंने तीखे शब्दों में रखा।डॉ. बोपचे ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 340 में स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद आज भी “क्रीमीलेयर” जैसी घटनाबाह्य शर्तों के कारण लाखों विद्यार्थी और युवा आरक्षण से वंचित हो रहे हैं। इसे हटाकर ही “जितनी संख्या भारी, उतनी भागीदारी” का लक्ष्य पूरा किया जा सकता है।महासंघ की प्रमुख माँगेंबैठक में सर्वसम्मति से ओबीसी समाज के हक में कई ठोस माँगें रखी गईं, जिनमें प्रमुख हैं -ओबीसी की जातिवार जनगणना तुरंत की जाए।, केंद्र में स्वतंत्र ओबीसी मंत्रालय की स्थापना हो।, क्रीमीलेयर की शर्त समाप्त की जाए, न्यायपालिका के सभी स्तरों पर आरक्षण लागू हो।, जिला व तहसील स्तर पर विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की व्यवस्था हो।, पदोन्नति में आरक्षण लागू कर रोकी गई न्याय प्रक्रिया बहाल की जाए।, बैकलॉग भर्ती के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।, किसानों को 100 प्रतिशत अनुदान पर कृषि संसाधन उपलब्ध हों।, आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा समाप्त की जाए।, मंडल आयोग, नचिप्पन समिति और स्वामिनाथन आयोग की सिफारिशें तुरंत लागू हों।, किसानों व खेत मजदूरों को 55 वर्ष की आयु के बाद पेंशन योजना दी जाए।, सरकारी व सार्वजनिक उद्योगों के निजीकरण पर रोक लगे।, महात्मा फुले और क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले को मरणोपरांत भारत रत्न सम्मान दिया जाए



